प्रदूषण पर सख्ती: सीएक्यूएम ने एनसीआर की 16 औद्योगिक इकाइयों को बंद किया
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एनसीआर में वायु प्रदूषण नियंत्रण के तहत सीएक्यूएम ने गंभीर उल्लंघनों पर 16 औद्योगिक इकाइयों को बंद करने के निर्देश जारी किए।
दिल्ली/ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण पर सख्ती दिखाते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने बड़े पैमाने पर कार्रवाई की है। आयोग ने विस्तृत निरीक्षणों के बाद गंभीर पर्यावरणीय उल्लंघनों के चलते 16 औद्योगिक इकाइयों को तत्काल बंद करने के निर्देश जारी किए हैं। यह कार्रवाई एनसीआर में प्रदूषण नियंत्रण, वैधानिक नियमों के अनुपालन और जनता के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है।
एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए चलाए जा रहे प्रवर्तन अभियान के तहत सीएक्यूएम ने कई औद्योगिक इकाइयों का गहन निरीक्षण किया। इन निरीक्षणों में पाया गया कि कई इकाइयाँ पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी करते हुए लंबे समय से संचालन कर रही थीं।
आयोग के अनुसार, कुल 16 औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इनमें से एक इकाई उत्तर प्रदेश के एनसीआर क्षेत्र में, एक राजस्थान के एनसीआर क्षेत्र में और शेष 14 इकाइयाँ हरियाणा के सोनीपत जिले में स्थित हैं। निरीक्षण के दौरान यह सामने आया कि कई इकाइयाँ बिना वैधानिक अनुमति के स्थापित और संचालित की जा रही थीं।
प्रमुख उल्लंघनों में स्थापना सहमति (CTE) और संचालन सहमति (CTO) के बिना उत्पादन, वायु प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों की अनुपस्थिति या उनका निष्क्रिय होना, प्रतिबंधित ईंधनों का उपयोग और ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के नियमों की अवहेलना शामिल है। इसके अलावा, कई इकाइयों में डीजल जनरेटर निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए और औद्योगिक प्रक्रियाओं से खुले तौर पर धुआं निकलता देखा गया।
सीएक्यूएम ने स्पष्ट किया कि यह केवल औपचारिक कार्रवाई नहीं, बल्कि पर्यावरणीय सुरक्षा के प्रति गंभीर रुख का संकेत है। आयोग ने दोषी इकाइयों को निर्देश दिए हैं कि जब तक सभी वैधानिक और पर्यावरणीय मानकों का पूर्ण अनुपालन नहीं किया जाता, तब तक उनका संचालन पूरी तरह बंद रहेगा।
आयोग ने यह भी दोहराया कि भविष्य में नियमों के उल्लंघन पर और अधिक कठोर कदम उठाए जाएंगे, जिनमें आर्थिक दंड, संचालन रद्द करना और कानूनी कार्रवाई शामिल हो सकती है। सीएक्यूएम ने एनसीआर में कार्यरत सभी उद्योगों से अपील की है कि वे पर्यावरणीय जिम्मेदारी को प्राथमिकता दें, प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों की नियमित निगरानी करें और हर स्तर पर नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें। यह कदम न केवल वायु गुणवत्ता सुधारने में सहायक होगा, बल्कि क्षेत्र में सतत औद्योगिक विकास को भी बढ़ावा देगा।